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कलिकाल में रामनाम जप ही मुक्ति का मार्ग”


दयाछपरा(बलिया)। ग्राम पंचायत जगदेवा के मिश्र गिरी के मठिया पर आयोजित नव दिवसीय नवाह रामचरित परायण यज्ञ में प्रवचन के क्रम में बिहार से पधारी मानस बाल विदुषी शिखा तिवारी ने बताया कि ईश्वर भक्ति काल में परिवर्तन हो सकता है। कर्म में नहीं। बताया कि मनुष्य तन में कभी कभी समयभाव हो सकता है। परन्तु क्रिया में अभाव नहीं होना चाहिए। कली काल में राम नाम जाप से बड़ा कोई धर्म नहीं है अन्य मंत्रों के लिए तो नियम कानून है।बताई कि
” कहो कहां लगी नाम बढ़ाई।
राम न सकही राम गुन गाई।।”
राम के नाम में कितना महत्व है कि स्वयं राम भी नहीं बता सकते।आप सोते बैठे शुद्ध काल में और अशुद्ध काल में दोनों में राम नाम मंत्र जाप करके अपना तथा अपने कुटुंब का कल्याण कर सकते हैं। नाम जाप में कोई शर्त नहीं है। पर दूसरी भक्ति में शर्त है प्रेम के बिना सत्संग नहीं हो सकता और बिना सत्संग के भक्ति नहीं होगी। यही भक्ति की सीढ़ी है। कहा कि आप लोग इस मंत्र का जप सुबह-शाम दोपहर करने का संकल्प ले जिससे मानव जीवन धन्य हो जाएगा बताया कि नारद मुनि कलिकाल में घूमने के बाद प्रभु ब्रह्मा से कहा कि हे प्रभु धरती पर कलि का प्रभाव बढ़ गया है ऐसे में मनुष्य पापाचार्य की तरफ बढ़ गया है उसका अल्प कल्याण का साधन अगर कोई हो तो आप बताए उस समय प्रभु ब्रह्मा ने इस मंत्र का जप करने के लिए बताया और कहा कि इस मंत्र के लिए कोई भी नियम कानून नहीं है जिस अवस्था में मनुष्य हो उसे अवस्था में रहकर इस मंत्र का जाप कर सकता है ।
मानस किंकर जी ने शिव विवाह की संगीत मय अनुपम झाकी प्रस्तुत की जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
कथा देर तक चलती रही जहां श्रद्धालु नर नारी कथा रूपी सागर में गोता लगाते रहे।

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