अध्यात्मकार्यक्रमदुबहड़बलिया

वैदिक पूजन एवं हवन के साथ संपन्न हुआ महायज्ञ,भण्डारे में श्रद्धालुओं ने किया प्रसाद ग्रहण


दुबहड़,(बलिया)। क्षेत्र के शिवपुर दियर नई बस्ती बेयासी में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ सह शुक्ल यजुर्वेद स्वाहाकार यज्ञ सोमवार को वैदिक मंत्रोचार,हवन पूजन ,पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ संपन्न हो गया। यज्ञ के अंतिम दिन रविवार को सुप्रसिद्ध कथा वाचक डॉ. ओंकार नारायण भारद्वाज ने राजा परीक्षित मोक्ष और सुदामा चरित्र की अत्यंत भावपूर्ण संगीतमय कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा व्यास डॉ. ओंकार नारायण भारद्वाज ने शुकदेव महाराज के अलौकिक जन्म का वर्णन करते हुए कहा कि वे इस संसार में केवल श्रीमद्भागवत का ज्ञान देने के लिए ही प्रकट हुए थे। वे माता के गर्भ में बारह वर्ष तक रहे। उन्होंने आगे शुकदेव-परीक्षित संवाद का जीवंत वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार कलयुग के प्रभाव में आकर धर्मात्मा राजा परीक्षित से समीक ऋषि के गले में मृत सर्प डालने का अपराध हुआ। ऋषि के पुत्र द्वारा दिए गए श्राप के कारण राजा को सातवें दिन तक्षक सर्प के डसने से मृत्यु का भय था, लेकिन शुकदेव जी द्वारा सुनाई गई अमर भागवत कथा के प्रभाव से राजा परीक्षित ने मोक्ष प्राप्त किया।

सुदामा चरित्र का प्रसंग बताते हुए डॉ. भारद्वाज ने कहा कि जब द्वारपाल ने द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण को सुदामा के आने की सूचना दी, तो प्रभु नंगे पांव मित्र की अगवानी के लिए दौड़ पड़े। यह दृश्य देखकर हर कोई हैरान था। भगवान ने सुदामा को अपने सिंहासन पर बैठाकर स्वयं अपने आंसुओं और हाथों से उनके पांव पखारे।
कथा व्यास ने कहा कि दुनिया में जिसके पास निश्छल प्रेम रूपी धन है, वह कभी निर्धन नहीं हो सकता। मित्रता में कोई राजा या रंक नहीं होता, इसमें ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं है।
इस दौरान बेयासी ढाले के दुकानदारों ने कथा व्यास डॉ ओंकार नारायण जी एवं उनके सहयोगियों को चादर ओढ़ाकर एवं पुष्प वर्षा कर सम्मानित किया। सम्मानित करने वालों में संतोष गुप्ता,सुनील पाठक, विनोद सेठ, पंकज गुप्ता, धन्ना सिंह, डॉ दीन दयाल वर्मा,हीरा गुप्ता आदि लोग रहे।

कथा से पूर्व वाराणसी (काशी) से पधारे प्रकांड विद्वान ब्राह्मणों द्वारा दिव्य महाआरती उतारी गई। महाआरती के दौरान बज रहे विभिन्न धार्मिक और भक्तिमय गीतों की धुनों पर पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालु झूमने और नाचने पर मजबूर हो गए। पूरा माहौल भक्तिमय और जयकारों से गुंजायमान हो उठा। सोमवार की सुबह यज्ञाचार्य पंडित रणजीत तिवारी के कुशल नेतृत्व में उपस्थित विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना एवं हवन किया गया। इसके साथ ही श्री शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न हुई। यज्ञ की समाप्ति पर सोमवार शाम को एक विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का आयोजन किया गया, जिसमें आस-पास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और पुण्य के भागी बने। यज्ञ समिति और स्थानीय युवाओं ने पूरी व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने में सराहनीय योगदान दिया। इस मौके पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि देवनारायण सिंह पूना, यज्ञ समिति अध्यक्ष भगवान जी मिश्रा, गणेश जी सिंह, राजू मिश्रा, बसंत सिंह, पूर्व प्रधान पिंटू मिश्रा, प्रधान धर्मेंद्र यादव, अभिमन्यु सिंह, अजीत यादव, सुरेंद्र यादव, गोरख चौरसिया, पवन गुप्ता, हीरा गुप्ता, अजय तिवारी, अवधेश तिवारी, अवध कुमार तिवारी, कृष्णा यादव, राजू तिवारी, छांगुर गिरी, वरुण सिंह, उपेंद्र राय, नंदकुमार चौबे, लखन खरवार, कर्ण यादव आदि लोग मौजूद रहे।

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