
दुबहड़(बलिया)। शिवपुर दियर नई बस्ती ब्यासी में आयोजित नौ दिवसीय श्री शतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन यज्ञ मंडप वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा। यज्ञाचार्य रंजीत तिवारी के कुशल निर्देशन में विद्वान वैदिक ब्राह्मणों द्वारा दुर्गासप्तशती का सस्वर पाठ किया गया तथा शुक्लयजुर्वेद के कल्याणकारी मंत्रों के साथ अग्निदेव को आहुतियां समर्पित की गईं। इस पावन अवसर पर समूचा क्षेत्र भक्तिमय परिवेश में सराबोर नजर आया।सायंकालीन सत्र में नैमिषारण्य से पधारे सुप्रसिद्ध भागवत मर्मज्ञ डॉ. ओंकार नारायण भारद्वाज ने उपस्थित जनसमुदाय को सृष्टि की प्रक्रिया, विदुर जी की अनन्य भक्ति और ध्रुव चरित की प्रेरक कथा सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया।

कथा व्यास ने समाज की परिभाषा को रेखांकित करते हुए कहा कि “समाज उसे कहते हैं जिसमें समस्त जातियों का समभाव समावेश हो। एक विखंडित समाज को जोड़ना और उसे संगठित करना ही मनुष्य का असली लक्षण है।”
उन्होंने आगे भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के अंतर्संबंधों को समझाते हुए कहा कि ज्ञान और वैराग्य के अभाव में भक्ति भी व्याकुल होकर रोने लगती है, इसलिए व्यक्ति को अंधभक्त नहीं बल्कि ‘ज्ञानवान भक्त’ बनना चाहिए। एक सच्चा भक्त संसार के समस्त प्राणियों में एक समान दृष्टि रखता है और सबको ईश्वर का ही अंश मानकर उनका आदर करता है।मानव स्वभाव पर प्रकाश डालते हुए डॉ. भारद्वाज ने सचेत किया कि मनुष्य की इंद्रियां अत्यंत बलवती होती हैं। यदि मनुष्य इनके वश में हो जाए, तो उसका जीवन नष्ट हो जाता है। इसलिए निरंतर भक्ति मार्ग को सुदृढ़ कर इंद्रियों को अपने वश में रखने का प्रयास करना चाहिए।कथा के दौरान वामनावतार की भव्य एवं सजीव झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे देखकर पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा।इस धार्मिक अनुष्ठान और कथा रसपान का आनंद लेने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। चौथे दिन मुख्य रूप से भगवान जी मिश्र समिति अध्यक्ष,पुन्ना सिंह ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि,संजय उपाध्याय पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष,श्रीप्रकाश मिश्र यज्ञाधीश,सहित क्षेत्र के अनेक संभ्रांत नागरिक, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में माताएं-बहनें तथा श्रद्धालु उपस्थित रहे। यज्ञ समिति द्वारा सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया ।



