
दयाछपरा( बलिया)।बैरिया नगर निगम के बुढ़वा शिव मंदिर पर आयोजित नवाह रामचरित मानस पाठ व प्रवचन के क्रम में गुरुवार की शाम वृंदावन धाम से पधारे ख्यातिलब्ध कथावाचक स्वामी सर्वानंद जी महाराज ने बताया कि जब जैसी जरूरत होती है उसके अनुसार प्रभु अपनी माया से कई रूप में प्रकट हो जाते हैं।संसार की रचना के समय प्रभु तपस्या के रूप में नौ प्रजापति के रूप में,मरीचि के रूप में ,मुनि के रूप में होते हैं।जब सृष्टि के रक्षा का समय होता है तब धर्म,विष्णु,मनु, देवता और राजाओं के रूप में भगवान ही होते हैं तथा उसी तरह जब सृष्टि में प्रलय करना होता है तब अधर्म,रुद्र तथा क्रोधवश सर्प व दैत्य आदि के रूप में सर्वशक्तिमान भगवान की माया की विभूतियां प्रकट होती हैं।
आगे बताए कि जब महादानी बलि, कर्ण,रावण आदि विद्वान भी प्रभु की माया को नहीं जान पाए तो और कौन जान पाएगा? धरातल पर कौन ऐसा पुरुष है जो भगवान की शक्तियों की गणना कर सके?जब प्रभु त्रिविक्रम अवतार लेकर त्रिलोकी नाप रहे थे उस समय उनके चरणों की अदम्य वेग से प्रकृति के अंतिम आवरण से लेकर सत्यलोक तक सारा ब्रह्मांड कांपने लगा था, तब प्रभु ने ही अपनी शक्ति से उसे स्थिर किया था।ऐसी अनंत शक्तियों के आश्रय स्वरूप को बड़े बड़े ऋषि मुनि भी नहीं जान पाते।संगीतमय कथा देर रात तक चलती रही जहां श्रद्धालु भक्त कथा श्रवण कर आनंदित होते रहे।कथा में मुख्य रूप से पीयूष मिश्रा,दयानंद पांडेय,राजीव पांडेय,आदि उपस्थित भक्तों की देख रेख में लगे रहे।



