
दयाछपरा (बलिया)। मनुष्य को जीवन में जब तक संत नहीं मिलेंगे तब तक भगवंत नहीं मिलेंगे। भगवान से मिलने के लिए संत का मिलना जरूरी है ।अगर सच्चे संत मिल गए तो भगवान से मिलना बहुत सरल हो जाता है। उक्त बातें दयाछपरा में आयोजित रामज्ञान यज्ञ में शुक्रवार की रात प्रवचन में मानस किंकर जी महाराज ने कहा। बताया कि जब प्रभु श्री राम ने जयंत को मारने के लिए धनुष से बाण छोड़ दिया तो,उसे बाण से बचाने वाला चराचर में कोई नहीं रह गया था। दो ही स्थान था एक जगत जननी मां सीता और दूसरा कोई संत, जगत जननी के पास जयंत पहुंच नहीं सकता था। बीच रास्ते में संत नारद मुनि से मुलाकात हो गई और नारद मुनि ने उसे पुनः प्रभु के शरण में भेज दिया। प्रभु का बाण भी जयंत को कुछ नहीं बिगाड़ पाया। अगर भगवंत का दर्शन करना है या चराचर में कुछ भी पाना चाहते हैं । तो संत का दर्शन संत का सानिध्य या गुरु का ज्ञान बहुत जरूरी है ।कथा देर रात तक चलती रही जहां सैकड़ो नर नारी कथा रूपी सागर में गोता लगाते रहे।



