
दयाछपरा( बलिया)। मनुष्य को सुखी जीवन प्राप्त करने का उपाय एकमात्र रामचरितमानस के अध्ययन से मिल सकता है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में मनुष्य की हर एक समस्याओं का निदान कर दिया है ।इसको केवल अध्ययन और मनन के द्वारा मनुष्य अपने जीवन को धन्य कर सकता है। उक्त बातें मानस प्रचार परिषद दयाछपरा द्वारा आयोजित 76वां मानस सम्मेलन के रामज्ञान यज्ञ में बुधवार की रात्रि मानस किंकर जी महाराज ने कही। बताया कि मनुष्य को सात सुख का कल्पना होता है।अगर सातों सुख मिल जाए तो मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है। और यह सातों सुख बिना प्रभु के आशीर्वाद का संभव नहीं है। कहा कि पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख घर में माया, तीसरा सुख कुलवंती नारी,चौथा सुख पुत्र आज्ञाकारी, पांचवा सुख स्वदेश में वास, छठवां सुख राज हो पास और सातवां सुख संतोषी जीवन ऐसा हो तो धन्य हो जीवन। अगर यह सातों सुख मनुष्य को मिल जाए तो जीवन धन्य हो जाता है परंतु जब तक सदाचार, सत्संग और प्रभु की कृपा नहीं होगी तो यह सुख मिलना मुश्किल है। धार्मिक आचरण के द्वारा रोग विकार से दूर रहकर अपने काया को शुद्ध सात्विक बनाया जा सकता है। कथा देर रात तक चलती रही जहां श्रद्धालु नर नारी कथा रूपी सागर गोता लगाते रहे।



