
दुबहड़ (बलिया)। क्षेत्र के शिवपुर दियर नई बस्ती बेयासी स्थित काली माता मंदिर के समीप चल रहे श्री शतचंडी महायज्ञ एवं शुक्लयजुर्वेद स्वाहाकार यज्ञ के छठवें दिन धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही। प्रतिदिन की भाँति वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन, पारायण एवं आहुतियाँ दी गईं। पूरा क्षेत्र वैदिक मंत्रों की ध्वनि से गुंजायमान रहा। सायंकालीन वेला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में नैमिषारण्य से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉ. ओंकार नारायण भारद्वाज ने भगवान श्री कृष्ण की बाललीलाओं का सरस एवं तत्वयुक्त विवेचन किया। महारास प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि

स्थितप्रज्ञ व्यक्ति ही महारास का वास्तविक पात्र होता है। महारास दरअसल जीवात्मा एवं परमात्मा के एकत्व (मिलन) की स्थिति है। यह एक ऐसी अद्वैत अवस्था है, जहाँ न शरीर का भान रहता है और न ही कोई शारीरिक प्रक्रियाएँ शेष रहती हैं। आजकल लोग महज नाचने-गाने को रासलीला की संज्ञा देने लगे हैं, जो कि मूल रासलीला की अवधारणा के बिल्कुल विपरीत है।
कथावाचक ने आगे की कथा में भगवान श्री कृष्ण का मथुरा गमन, कंस वध, सांदीपनि आश्रम में जाकर शिक्षा ग्रहण करना और मार्मिक गोपी-उद्धव संवाद का सजीव वर्णन किया। इन प्रसंगों को सुनकर दूर-दूर से पधारे हजारों की संख्या में श्रद्धालु और संत समाज भावुक हो उठे।कथा के अंतिम चरण में भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया गया। इस दौरान भव्य और मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई। वेदियों पर हो रहे विवाह के अद्भुत दर्शन कर पंडाल में उपस्थित तमाम भक्तगण खुद को रोक नहीं पाए और भक्ति के सागर में डूबकर झूमने व नृत्य करने पर विवश हो गए। आरती और प्रसाद वितरण के साथ छठवें दिन की कथा संपन्न हुई। इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि देवनारायण सिंह (पूना), यज्ञ समिति अध्यक्ष भगवान जी मिश्रा, ग्राम प्रधान धर्मेंद्र यादव, पूर्व ग्राम प्रधान पिंटू मिश्रा, गणेश जी सिंह, राजू मिश्रा, बीडीसी पवन गुप्ता, के डी सिंह, चंद्र प्रकाश पाल आदि हजारों नर नारियों ने पंडाल में उपस्थित रहकर कथा रूपी रसपान किया और पुण्य के भागी बने।



