अध्यात्मकार्यक्रमबलिया

रामानुज आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा का भावपूर्ण वर्णन,श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर श्रद्धालु हुए भाव-विभोर


लालगंज (बलिया)। क्षेत्र के रामानुज आश्रम, शिवपुर कपूर दीयर सेमरिया में श्री श्री 1008 श्री कमल नयन ब्रह्मचारी जी की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सह लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के अंतर्गत कथा के पाँचवें दिन भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। वृंदावन धाम से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक श्री जगतगुरु रामानुजाचार्य चतुर्भुजाचार्य स्वामी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण एवं संगीतमय वर्णन किया।
कथा के दौरान स्वामी जी ने पूतना वध, माखन चोरी, कालिया नाग दमन तथा गोवर्धन पूजा जैसी मनोहारी एवं शिक्षाप्रद लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म के मात्र छह दिन बाद ही अपनी दिव्य लीलाओं का आरंभ कर दिया था। पूतना वध की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि कंस ने अपने मृत्यु भय के कारण गोकुल में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं की हत्या के लिए पूतना राक्षसी को भेजा था। पूतना द्वारा विष लगे स्तनों से भगवान को दूध पिलाने के छल के बावजूद भगवान ने विष सहित दूध का पान कर उसका वध कर दिया।

कथा में आगे बताया गया कि पूतना के वध के पश्चात माता रोहिणी और माता यशोदा वहां पहुंचीं और भगवान को उसकी छाती पर खेलते हुए देखा। माता यशोदा ने स्नेहपूर्वक भगवान को गोद में लेकर चूमा। संगीतमय प्रस्तुति के दौरान भगवान द्वारा मिट्टी खाने, माखन चुराने, कालिया नाग के मान-मर्दन, इंद्र पूजा रोकने पर हुई अतिवृष्टि तथा गोकुलवासियों की रक्षा हेतु गोवर्धन पर्वत को एक उंगली पर धारण करने की लीला का भी सुंदर वर्णन किया गया। साथ ही चीरहरण एवं वस्त्र चोरी की कथा के माध्यम से भक्ति और मर्यादा का संदेश दिया गया।

स्वामी जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं न केवल बच्चों के चरित्र निर्माण में सहायक हैं, बल्कि समाज को जीवन प्रबंधन और भक्ति का मार्ग भी दिखाती हैं। कथा श्रवण के दौरान पूरा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा और सैकड़ों की संख्या में पुरुष एवं महिला श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का रसपान करते नजर आए।

कार्यक्रम में आयोजक स्वामी जगतगुरु रामदुजाचार्य श्री राधाकृष्णाचार्य सहित अन्य संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ पाँचवें दिन की कथा का समापन हुआ। आयोजन की व्यवस्था में मृत्युंजय उपाध्याय, भीम सिंह, शैलेंद्र सिंह, अशोक यादव, पूर्व प्रधान वीरेंद्र यादव सहित दर्जनों लोग सक्रिय रूप से जुटे रहे।

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