
दयाछपरा(बलिया)। जो गॉड को नहीं मानता उसका जीवन इसके उल्टा डॉग के समान होता है। गृहस्थ का जीवन भौतिक सुख सुविधा बटोरने में ही समाप्त हो जाता है और यही दुख का कारण भी है। अपने जरूरतों को सीमित करो और प्रभु में ध्यान लगाओ सुख ही सुख है।
उक्त बातें मानस प्रचार परिषद दयाछपरा द्वारा आयोजित 76 वा मानस सम्मेलन में श्री रामयज्ञ के पूर्व सोमवार के दिन यज्ञ स्थल पर पधारे ख्याति लब्ध संत विनय ब्रम्हचारी जी महाराज ने कही।
बताया कि जब तक शरीर साथ दे रहा है तब तक तीर्थ स्थल का दर्शन कर लेना चाहिए। बुढ़ापा तो स्वयं भार हो जायेगा। बताया कि जिस दिन प्रभु के हो जाओगे किसी वस्तु की जरूरत नहीं होगी। सब कुछ बिन मांगे मिल जाएगा। बुढ़ापा में परिवारी जनों पर आश्रित होते हो इसलिए कुछ नहीं मिलने पर कष्ट होता है।प्रभु पर आश्रित होकर देखो, पूरा संसार देने के लिए उत्सुक रहेगा। जो खोजोगे वह पहले ही मिल जाएगा।



