
बलिया । केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने एक बैठक में अवैध ई-फार्मेसी प्लेटफ़ॉर्म के खिलाफ गहरी चिंता व्यक्त की और सदस्यों से इस गंभीर विषय पर सजग रहने की अपील की। बैठक की अध्यक्षता आनन्द सिंह ने की और संचालन बब्बन यादव द्वारा किया गया।
बैठक में बताया गया कि ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) — जो देशभर के 12.40 लाख से अधिक केमिस्टों का प्रतिनिधित्व करता है — ने केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से अवैध ई-फार्मेसियों के विरुद्ध सख्त और त्वरित कार्रवाई की माँग की है। AIOCD के अध्यक्ष जे. एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल को पत्र लिखकर CDSCO द्वारा बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों (SLA) द्वारा कोई ठोस कार्यवाही न होने पर चिंता जाहिर की है।
AIOCD ने यह भी कहा है कि GSR 220(E) और GSR 817(E) जैसे अधिसूचनाएं, जिनका इस्तेमाल अब ई-फार्मेसियाँ अपने अनियमित कार्यों को जायज़ ठहराने में कर रही हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
संगठन की प्रमुख माँगें:
- GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
- सभी अवैध ऑनलाइन फार्मेसियों के विरुद्ध केंद्रीय स्तर पर सख्त प्रवर्तन कार्रवाई हो।
- SLA को सभी लंबित शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही करने का निर्देश दिया जाए।
AIOCD ने दोहराया कि ऑनलाइन प्लेटफार्मों के ज़रिए बिना डॉक्टर की पर्ची के नशीली और आदत डालने वाली दवाइयों की बिक्री जन स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। इन प्लेटफार्मों से अनधिकृत, बिना लाइसेंस, और बिना गुणवत्ता जांच के दवाइयाँ बेची जा रही हैं, जो ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 का स्पष्ट उल्लंघन है।
बैठक में संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें अनिल त्रिपाठी, राजेश, विशाल, अजित, लाल बहादुर वर्मा, मनोज, मूमताज, हसन शाहनवाज, संजय दूबे, वरुण तिवारी, संदीप अग्रवाल और बिनोद प्रमुख थे।
AIOCD ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्यवाही नहीं की गई, तो यह जन स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी और अपरिवर्तनीय आपदा का रूप ले सकती है। संगठन ने भारत सरकार से अपील की है कि वह देश की दवा प्रणाली की साख और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए।



