
दयाछपरा(बलिया)। स्थानीय ग्राम पंचायत में आयोजित नव दिवसीय रामयज्ञ के छठवें दिन गुरुवार को क्षेत्र के कर्मकांड के प्रखंड विद्वान पंडित घनश्याम मिश्रा व रणजीत तिवारी के नेतृत्व में यज्ञ मंडप में पूजन व हवन का कार्य शाम बजे तक चला।इसके बाद रात में प्रवचन के क्रम में मानस किंकर जी महराज ने बताया कि जब तक आचरण शुद्ध नहीं होगा, तब तक चरण की पूजा नहीं हो सकती, आप बड़ा तभी हो सकते हैं। जब आपको छोटे का स्नेह प्राप्त हो और छोटे का स्नेह तभी मिलेगा जब आप छोटे को स्नेहाशीष देंगे।
बताया कि यदि भार नाम की कोई वस्तु है,तो ढोने वाले के लिए है ,यदि कोई मार्ग है,तो वह चलने वाले के लिए है,मोटापा भी उसी का है,यह सब शरीर के लिए कहा जाता है, आत्मा के लिए नहीं।ज्ञानी जन ऐसी बात नहीं करते,स्थूलता,कृषता,आधी,व्याधि,भूख,प्यास , भए,कलह,इच्छा ,बुढ़ापा,निद्रा, प्रेम, क्रोध,अभिमान,और शोक यह सब धर्म देहाभिमान को लेकर उत्पन्न होने वाले जीव में रहते हैं।
अभिमान मनुष्य को बर्बाद कर देता है। इस संसार में सभी दुखों की जड़ अभिमान है।
संस्रिति मूल सूल कर नाना।
सकल शोक दायक अभिमाना।।
अगर आचरण देखना है तो प्रभु श्री राम का आचरण देखिए सब को स्नेह दिया। तब लोग उन्हें भगवान माने। जनक पुर में गुरु की आज्ञा लेकर जब जनकपुर का दर्शन करने लखन के साथ गए तो पहले ही लखन से कहे कि नजरे झुका कर चलो। यही नहीं कही भी अपने गुरु के आज्ञा के बिना नहीं गए। कथा देर रात तक चलती रही जहां श्रद्धालु नर नारी कथा रूपी सागर में गोता लगाते रहे।यज्ञ स्थल पर मुख्य रूप से यज्ञ समिति के अध्यक्ष अंजनी कुमार पांडेय,राजनाथ पांडेय,हरेंद्र पांडेय,दुर्गा शंकर पांडेय,सत्य प्रकाश पांडेय,मनोज कुशवाहा,रिपुंजय पांडेय,अनिल कुमार पांडेय आदि देख रेख में तत्पर रहे।



