
दयाछपरा(बलिया)। दान हमेशा सुपात्र को देना चाहिए कुपात्र को दिया गया दान दोनों कुलों का नाश करता है,जो कुपात्र दान लेता है उसका तो नाश होगा ही जो कुपात्र को दान देता है उसे भी और उस कुपात्र का परिणाम को भोगना पड़ता है ।
उक्त बातें स्थानीय ग्राम सभा के मां काली स्थान पर आयोजित शतचंडी महायज्ञ में पधारे संत रामभद्राचार्य उर्फ बालक बाबा ने कही। बताया कि इस संसार के सभी प्राणी दान लेते हैं, तो दान देना भी पड़ेगा, बताया कि प्रकृति के द्वारा मुफ्त में हवा, पानी, आग ,जल, दान ही तो दिया जाता है, जो मनुष्य को मनुष्य कहलाने योग्य बनाता है तो मनुष्य का भी कर्तव्य होता है कि अपने जीवन में जो भी कमाई करे उसका 10% दान कर देना चाहिए। लज्जा बश दिया गया दान निम्न श्रेणी में आता है साथ ही भय बश दिया गया दान भी निम्न श्रेणी में आता है। दान खुश होकर देना चाहिए और दिया गया दान का न घमंड करना चाहिए ना कहीं वर्णन करना चाहिए। आज कलिकाल में तो देखने को मिलता है कि किसी भिक्षुक को एक केला दान देकर 10 लोग फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर प्रचार करते हैं ।वह दान नहीं है,वह तो उस गरीब का मजाक है, भिक्षुक को भोजन देना, चीटियों को अन्न खिलाना, चिड़ियों के लिए अन्न और जल रखना किसी यज्ञ में दान देना अथवा जलाशय बनवा देना, चिकित्सालय बनवाना, विद्यालय बनाना यह ऐसा दान है कि इसका प्रतिफल हर समय इंसान को मिलता रहता है। अतः सभी प्राणियों को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करते रहना चाहिए। कथा देर तक चलती रही जहां श्रद्धालु नर नारी कथा रूपी सागर में गोता लगाते रहे।



