
दयाछपरा(बलिया)। मां काली मंदिर के परिसर में आयोजित शतचंडी महायज्ञ में शुक्रवार की शाम मानस किंकर जी महराज ने बताया कि जब प्रभु श्रीराम ने जयंत को मारने के लिए धनुष से बाण छोड़े तो उसे बाण से बचाने वाला कोई नहीं था।बचने के लिए दो ही स्थान थे,पहला जगत जननी मां सीता और दूसरा कोई संत।जगत जननी मां के पास जयंत पहुंच नहीं सकता था। बीच रास्ते में उसे संत नारद जी से मुलाकात हो गई तथा नारद मुनि ने उसे पुनः प्रभु की शरण में भेज दिया।
इसके बाद संत रामभद्राचार्य उर्फ बालक बाबा के निर्देशन में ग्रामीणों ने वसंत पंचमी के अवसर पर फाग गायन का शुभारंभ किया।बुजुर्ग बजरंग पांडेय ने ” खेलत वसंत राजाधिराज।नभ कौतुक देखे सुर समाज।।” सत योजन मरजाद सिंधु के सो कोई बांध सके ना, ताहि बांधी उतरे रघुनंदन,संग भालू कपि सेन समर कोई जीती सके ना।रघुबर जी से बैर करो ना।”आदि धमार,फाग व होरी गाकर शमा बांध दिया।उनके साथ कन्हैया जी,चिंपू,हरेंद्र पांडेय,भगवान जी,भगवान जी,उमेश्वर पांडेय,रिपुंजय पांडेय आदि ढोल,झाल के साथ फाग गायन करके वसंत ऋतु का स्वागत किए।



