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अपूर्वा नर्सिंग होम में महिला की मौत, पांच डाक्टरों पर मुकदमा दर्ज

बलिया । संवाददाता जिला मुख्यालय के चर्चित अपूर्वा नर्सिंग होम में इलाज के दौरान रविवार की सायं 24 वर्षीय महिला की मौत के बाद हड़कंप मच गया। परिजनों की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने पांच डाक्टरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम को भेज दिया है तथा अस्पताल के ओटी को सील कर दिया हैं। पुलिस ने अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है।
जानकारी के अनुसार, 22 मार्च को दोपहर करीब 2 बजे सुखपुरा थाना क्षेत्र के देवकली निवासी अनिशा पांडेय अपने परिजनों के साथ पथरी का लेजर आपरेशन कराने अपूर्वा नर्सिंग होम पहुंचीं। बताया जा रहा है कि अस्पताल में आपरेशन के लिए परिजनों से 50 हजार रुपये जमा कराए गए तथा 50 हजार और जमा करने के लिए कहा गया।
आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डाक्टरों ने लेजर तकनीक के बजाय ओपन सर्जरी कर दी। कुछ समय बाद डा. ज्योत्स्ना सिंह ओटी से बाहर आईं और परिजनों को महिला की हालत गंभीर बताते हुए उसे तुरंत मेदांता अस्पताल लखनऊ अस्पताल ले जाने को कहा। जब परिजन अंदर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि महिला की मौत हो चुकी थी।

परिजनों का आरोप

शिवान्शु ने तहरीर देकर आरोप लगाया है कि डा. ज्योत्स्ना सिंह, डा.अपूर्वा सिंह, डा.दीपक सिंह, डा.संजय सिंह व डा. रोहन गुप्ता ने आपरेशन किया। डाक्टरों ने सच्चाई छिपाने की कोशिश की और गलत जानकारी दी।उनका आरोप है कि लापरवाही और धोखे से किए गए आपरेशन के कारण ही अनिशा की मौत हो गई। अनिशा ने छः माह पूर्व ही सीजेरियन ऑपरेशन से बच्चे को जन्म दिया था।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों की तहरीर के आधार पर पांच डाक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया है, हालांकि अन्य मरीजों के भर्ती होने के कारण पूरे नर्सिंग होम को सील नहीं किया गया।

सबसे बड़ा सवाल:

मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी डाक्टर की गिरफ्तारी न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई में देरी हो रही है। एक सप्ताह पूर्व ही शहर में ही एक अन्य निजी अस्पताल में एक महिला व उसके नवजात शिशु की आपरेशन के दौरान मौत हो गई थी। जनपद में लगातार हो रही ऐसी घटना एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बलिया जनपद का स्वास्थ्य विभाग मूकदर्शक होकर देख रहा है।

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