
बलिया। रमज़ानुल मुबारक के पावन महीने में इबादत, सब्र और आत्मसंयम का जज़्बा केवल बड़ों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों में भी इसकी मनोहारी झलक देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में बलिया शहर के बिशुनीपुर स्थित शिया मस्जिद के सामने रहने वाले जामा मस्जिद के सेक्रेटरी अहमद हसन एडवोकेट के आठ वर्षीय पुत्र अहमद अली उर्फ कमाल ने रविवार को रमज़ान का चौथा रोज़ा रखकर सभी का दिल जीत लिया।
नन्हे कमाल के लिए यह रोज़ा खास और यादगार रहा। भोर में उनकी दादी ने उन्हें प्यार से जगाकर सहरी कराई और पूरे दिन रोज़ा रखने के लिए हौसला बढ़ाया। मासूम उम्र में रोज़ा रखने की इस कोशिश पर दादी की आंखों में खुशी और दुआओं की चमक साफ दिखाई दी। खुशी के इस मौके पर उन्होंने अपने पौत्र को त्योहारी भी दी, जिससे कमाल का उत्साह और बढ़ गया।
रोज़ेदार कमाल को परिवार के सभी सदस्यों ने गले लगाकर मुबारकबाद दी और उसके उज्ज्वल भविष्य, अच्छे स्वास्थ्य व कामयाबी के लिए दुआ की। घर का माहौल इबादत, मोहब्बत और आपसी सौहार्द से सराबोर नजर आया।
इस अवसर पर परिजनों और मोहल्ले के लोगों ने कहा कि इतनी कम उम्र में रोज़ा रखने का जज़्बा न केवल परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणादायक संदेश देता है। नन्हे कमाल का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि रमज़ान का पैग़ाम—सब्र, अनुशासन और इंसानियत—नई पीढ़ी के दिलों में भी गहराई से उतर रहा है।



