
दयाछपरा( बलिया)।शरीर साधन है और पूजा जप, तप ,यज्ञ,साधना है। साधना कभी साध्य नहीं हो सकता। अगर साधना से साधक का साध्य से मिलन हो जाए तो वह साधन नहीं रह सकता वह साध्य हो जाएगा ।भगवान की केवल कृपा मिलती है ।कृपा का ही अनुभूति होती है जो लोग कहते हैं कि मुझे भगवान से मुलाकात हुई है। यह केवल मिथ्या है। भगवान के केवल कृपा मिलती है,दर्शन स्पर्श नहीं।
उक्त बातें स्थानीय ग्राम सभा के काली मंदिर पर आयोजित शतचंडी महायज्ञ में ख्याति लब्ध संत रामभद्राचार्य उर्फ बालक बाबा ने कही।
बताया कि साधु संत केवल भगवत प्राप्ति का रास्ता बता सकते है। बताया कि सनातन धर्म में आश्चर्य की कमी नहीं है नजदीक जाने पर मालूम होता है। विज्ञान का जहां अंत होता हैं वही से धर्म की उत्पत्ति होती है।जगन्नाथ मंदिर का ध्वज हवा के विपरीत फहरता है यहां विज्ञान फेल है। मंदिर के ऊपर से कोई विमान, या चिड़िया नहीं जाती। मानते है विमान चालक रास्ता बदल देता है।पर चिड़िया को किसने प्रशिक्षण दिया है। कथा देर तक चलती रही जहां श्रद्धालु नर नारी कथा रूपी सागर में गोता लगाते रहे।



