अध्यात्मकार्यक्रमबलिया

रामचरित मानस का प्रथम शब्द वर्ण व अंतिम शब्द मानव

दयाछपरा(बलिया)।श्री रामचरित मानस का प्रथम शब्द वर्ण और अन्तिम शब्द मानव है,इसका अभिप्राय यह है कि गोस्वामी तुलसीदास ने अपने ग्रंथ रामचरित मानस के माध्यम से यह संदेश देना चाह रहे हैं कि चारो वर्ण के लोग जब तक ब्राम्हण,क्षत्रीय, वैश्य और शूद्र की भावना त्याग कर मानव नही बनेंगे,तब तक समाज का कल्याण नही हो सकेगा।
उक्त उद्गार नगर पंचायत बैरिया स्थित बुढ़वा शिव मंदिर पर 59 वे रामचरित मानस नवाह पाठ व प्रवचन के क्रम में सोमवार के शाम वृंदावन धाम निवासी ख्याति लब्ध कथा वाचक स्वामी सर्वानंद महाराज के हैं।बताए कि आज हम वर्ण और जातीय व्यवस्था को लेकर संघर्षरत है,इससे समाज को बहुत ही छति हो रही है।
हमे वर्ण व्यवस्था से उपर उठकर समाज मे मानवता को स्थापित करना होगा। ये तभी संभव है जब हम श्री रामचरित मानस को पढेंगे, समझेंगे, और आत्मसात करेंगे।संगीतमय कथा देर शाम तक चलती रही।अनेकों भजन के साथ महराज जी ने कथा का वर्णन किए।जहां श्रोता रामभक्ति की सरिता में गोता लगाते रहे।

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