बेटियों ने निभाया फर्ज:पुत्रियों ने मां को दी मुखाग्नि,पूरे विधि-विधान से किया अंतिम संस्कार

लंबी बीमारी के बाद 68 वर्षीय शैल कुमारी का निधन, छोटी बेटी डॉ. आकृति ने किया पिंडदान
बलिया । गड़वार क्षेत्र में बेटियों ने समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। गड़वार निवासी 68 वर्षीय शैल कुमारी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके कोई पुत्र नहीं थे, केवल दो पुत्रियां अनु और डॉ. आकृति हैं।
मां के निधन के बाद दोनों बेटियों ने आगे बढ़कर पूरी जिम्मेदारी निभाई। अनु और डॉ. आकृति ने अपनी मां के पार्थिव शरीर को कंधा दिया और श्मशान घाट तक लेकर गईं। वहां उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया। छोटी बेटी डॉ. आकृति ने पिंडदान किया और अपनी मां को मुखाग्नि दी। इस दौरान का वीडियो भी सामने आया है।

अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। इनमें मृतका के दामाद शैलेंद्र प्रताप वर्मा, प्रभु नाथ वर्मा, जगत नारायण वर्मा, समाजसेवी मन्नू सिंह, विजय प्रकाश वर्मा, मुन्ना चौरसिया और शंकर भारती सहित कई गणमान्य लोग शामिल रहे।
बेटियों ने बताया कि उनकी मां लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उन्होंने अपनी मां की अंतिम इच्छा के अनुरूप ही यह संस्कार स्वयं संपन्न किया।
PHD के बाद प्रयागराज में कर रहीं तैयारी
मृतका शैल कुमारी मूल रूप से बलिया के अपायल गांव की निवासी थीं। उनके पति का निधन वर्ष 2017 में हो गया था। बड़ी बेटी अनु की शादी गड़वार निवासी शैलेंद्र वर्मा से हुई है।
पति के निधन के बाद शैल कुमारी अपनी बड़ी बेटी अनु के साथ गड़वार में रह रही थीं। छोटी बेटी डॉ. आकृति पीएचडी पूरी करने के बाद प्रयागराज में रहकर सिविल सेवा की तैयारी कर रही हैं।
बेटियों द्वारा किया गया यह अंतिम संस्कार क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और समाज में बेटियों की बदलती भूमिका का संदेश दे रहा



