
बलिया। प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के 141वां जन्मदिवस के शुभ अवसर पर राजवंशी देवी के पैतृक गांव रामपुर के विद्यालय अपराजिता सरस्वती राजवंशी देवी जूनियर हाई स्कूल के प्रांगण में बंद युगल प्रतिमा के सामने फोटो रखकर उन्हें याद किया गया । उनके परिवार के लोगों का कहना है कि जब तक प्रतिमा का अनावरण नहीं हो जाएगा तब तक संघर्ष की लड़ाई लड़ते रहेंगे । उनके पोपत्र सुजान श्रीवास्तव उर्फ (राहुल )का कहना है कि हमारे पूर्वज और ट्रस्ट के संस्थापक रहे स्वर्गीय सर्वदेव श्रीवास्तव उर्फ चुन्नू लाल का सपना था कि प्रथम राष्ट्रपति और उनके पत्नी का आदम कद प्रतिमा का अनावरण किसी माननीय के हाथों हो।उनके अधूरे सपने को पूरा करने हेतु हमने भी कुछ ऐसा ही संकल्प अपने मन में ठान लिया है। और इसी के तहत कई बार पत्र के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार, व देश के माननीय यशस्वी प्रधानमंत्री, तथा उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री तक अपनी बात को पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया और पहुंचा भी, परंतु आज तक कोई सार्थक पहल नहीं हो पाया, अनेकों बार जिला प्रशासन से भी गुहार लगाई लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। देश की आजादी में महत्वपूर्ण रचनात्मक भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारियों का यह हाल है आज उनके 141 वें जन्मदिन के शुभ अवसर कार्यक्रम में मुख्य रूप से रजनीश श्रीवास्तव,सुजान श्रीवास्तव अमन श्रीवास्तव, दुर्गा दत्त श्रीवास्तव ,दीपक श्रीवास्तव, अभिषेक श्रीवास्तव, टुनटुन गोंड, जितेंद्र ,चंद्रभान सिंह, सुशील पासवान, राज किशोर सिंह ,कमलेश पासवान आदि दर्जनों लोग उपस्थित रहे ।
जनपद बलिया के पूर्वी छोर पर बसे विकासखंड मुरली छपरा के ग्राम पंचायत रामपुर में प्रथम राष्ट्रपति का ससुराल है। यहां 1999 में ही संगमरमर की प्रथम राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की आदम कद प्रतिमा लगाई गई थी तब से ही राजवंशी देवी के परिजन किसी माननीय से उसका अनावरण कराने को इच्छुक है। लेकिन 26 वर्षों से ऐसा नहीं हो सका। उनके परिवार के सुजान श्रीवास्तव का कहना है कि धन्य है हमारे माननीय जिन्हें आजादी का परम सुख तो चाहिए परंतु आजादी दिलाने में मुख्य क्रांतिकारी की भूमिका निभाने वाले आजादी के उन क्रांतिकारी दीवानों के प्रति कोई कर्तव्य का बोध नहीं हो रहा है ।
राजेंद्र बाबू की शादी बाबू हरिनंदन सहाय की बेटी राजमाता राजवंशी देवी से हुआ था । देश को आजादी प्राप्त होने के बाद राजेंद्र बाबू का भाग्योदय हुआ।और वे आजाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने । प्रतिमा के अनावरण के लिए सपा सरकार, बसपा सरकार और वर्तमान भाजपा सरकार में कई बार आवेदन किया गया लेकिन उन आवेदनों से अभीष्ट सिद्ध नहीं हो पाया, और आज तक प्रतिमा का अनावरण नहीं हो सका ।



