कार्यक्रमबलियालालगंज

श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भक्ति,ज्ञान औ जीवंत स्वरूप है


लालगंज(बलिया) । क्षेत्र के रामानुज आश्रम शिवपुर कपूर दीयर (सेमरिया ) मे बैकुंठवासी श्री श्री 1008 श्री कमल नयन ब्रम्हाचारी जी के 11 वें पुण्य तिथि पर आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण सह लक्ष्मी नारायण माहायज्ञ मे श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं को कथा का अमृतपानकराते हुये जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री स्वामी राधाकृष्णाचार्य महाराज ” ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा देने वाली अमृतमयी कथा है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का भाव जागृत होता है। स्वामी जी ने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और भागवत कथा का श्रवण ही मोक्ष का सरल मार्ग है। स्वामी राधाकृष्णाचार्य ने श्रद्धालुओं से धर्म के मार्ग पर चलने, सदाचार अपनाने और समाज में प्रेम व सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया । स्वामी जी ने भागवत महापुराण के महात्म्य का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का जीवंत स्वरूप है।

प्रथम दिन की कथा में राजा परीक्षित को श्राप मिलने के बाद उन्होंने संसारिक मोह त्याग कर गंगा तट पर बैठकर शुकदेव मुनि से भागवत कथा का श्रवण किया। शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को बताया कि कलियुग में मनुष्य के उद्धार का सबसे सरल मार्ग भगवान श्रीहरि का नाम स्मरण और भागवत कथा का श्रवण है l श्रीमद्भागवत पुराण मानव को अहंकार, लोभ और मोह से मुक्त कर ईश्वर भक्ति की ओर प्रेरित करता है। कथा श्रवण मात्र से मन शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
प्रथम दिन की कथा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर कथा का श्रवण किया और पुण्य लाभ अर्जित किया।

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